पाठ्यक्रम: GS2/राजव्यवस्था और शासन
संदर्भ
- केंद्र सरकार ने नागरिकता नियम, 2009 में मसौदा संशोधन अधिसूचित किया है, जिसके अंतर्गत कुछ आवेदकों को पाकिस्तान, अफ़ग़ानिस्तान और बांग्लादेश द्वारा जारी पासपोर्ट के स्वामित्व या समर्पण की घोषणा करना अनिवार्य होगा।
परिचय
- नए प्रावधान के अनुसार आवेदकों को यह बताना होगा कि उनके पास इन तीन पड़ोसी देशों में से किसी का वैध अथवा समाप्त पासपोर्ट है या नहीं।
- जिनके पास ऐसा पासपोर्ट है, उन्हें पासपोर्ट विवरण प्रस्तुत करना होगा और नागरिकता स्वीकृति के 15 दिनों के अंदर संबंधित वरिष्ठ अधीक्षक डाकघर को दस्तावेज़ समर्पित करना होगा।
- नया उपबंध नागरिकता नियमों के अनुसूची IC में जोड़ा गया है। यह खंड अफ़ग़ान, बांग्लादेशी और पाकिस्तानी मूल के हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदायों से संबंधित नागरिकता आवेदनों पर लागू होता है।
- नागरिकता (संशोधन) अधिनियम, 2019 ने उन गैर-मुस्लिम प्रवासियों को भारतीय नागरिकता प्रदान करने का मार्ग प्रशस्त किया था, जो पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफ़ग़ानिस्तान से दिसंबर 2014 से पूर्व भारत आए थे।
- अधिकारियों ने इस संशोधन को प्रशासनिक स्पष्टता बताया है, जिसका उद्देश्य नागरिकता मामलों में सत्यापन और अभिलेख-रखरखाव को सुदृढ़ करना है।
नागरिकता
- संविधान की संघ सूची में नागरिकता सम्मिलित है और यह संसद के विशेषाधिकार क्षेत्र में आती है।
- संविधान ‘नागरिक’ शब्द को परिभाषित नहीं करता, परंतु भाग II (अनुच्छेद 5 से 11) में नागरिकता प्राप्त करने के विभिन्न वर्गों का उल्लेख है।
भारतीय नागरिकता प्राप्त करने के प्रकार
- नागरिकता अधिनियम, 1955 नागरिकता प्राप्त करने के पाँच प्रकार निर्धारित करता है:
- जन्म द्वारा नागरिकता।
- वंश द्वारा नागरिकता।
- पंजीकरण द्वारा नागरिकता।
- प्राकृतिककरण द्वारा नागरिकता।
- क्षेत्रीय विलय द्वारा नागरिकता (भारत सरकार के निर्णय से)।
- भारतीय नागरिकता अधिनियम, 1955 के अंतर्गत भारतीय मूल के व्यक्तियों को द्वैध नागरिकता की अनुमति नहीं है। यदि किसी व्यक्ति ने कभी भारतीय पासपोर्ट रखा हो और बाद में किसी अन्य देश का पासपोर्ट प्राप्त किया हो, तो उसे तत्काल भारतीय पासपोर्ट समर्पित करना आवश्यक है।
भारतीय नागरिकता की समाप्ति
- त्याग : कोई भी भारतीय नागरिक जो किसी अन्य देश का नागरिक भी है, यदि वह निर्धारित घोषणा द्वारा भारतीय नागरिकता त्याग देता है तो उसकी नागरिकता समाप्त हो जाती है।
- समापन : यदि कोई भारतीय नागरिक स्वेच्छा से किसी अन्य देश की नागरिकता ग्रहण करता है तो उसकी भारतीय नागरिकता समाप्त हो सकती है।
- वंचन : कुछ परिस्थितियों में भारत सरकार किसी व्यक्ति की नागरिकता समाप्त कर सकती है। यह सभी नागरिकों पर लागू नहीं होता। वंचन की शर्तें हैं:
- धोखाधड़ी से नागरिकता प्राप्त की हो।
- भारत के संविधान के प्रति अविश्वास दिखाया हो।
- युद्धकाल में अवैध व्यापार या संचार किया हो।
- प्राकृतिककरण के पाँच वर्षों के भीतर यदि नागरिक को दो वर्ष के कारावास की सज़ा हुई हो।
- सात वर्षों तक भारत से बाहर सामान्य निवास किया हो।
- यह संशोधन नागरिकता प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और अभिलेखीय दृष्टि से सुदृढ़ बनाने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम है।
स्रोत: IE
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